शिवरीनारायण में पांच दिवसीय फागुन महोत्सव का आयोजन किया गया. इस दौरान बताशे, बेर, टमाटर, गन्ने और पा रम्परिक रंग ग़ुलाल की होली खेली गई
नगर में पहली बार सार्वजनिक रूप से होलिका दहन का कर्यक्रम नगर पंचायत कार्यालय के सामने मेला ग्राउंड में नगर पंचायत द्वारा किया गया और आने वाले वर्षो में सार्वजनिक होलिका दहन का कार्यक्रम प्रतिवर्ष मनाने की घोषणा की गई. इस अवसर पर संत रितेश्वर जी ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य का विषय है कि लोग त्यौहार के असली मर्म को समझ नहीं पा रहे और केवल इवेंट के चक्कर में पड़े हैं. होली का उत्सव होलिका, प्रहलाद और भगवान नरसिंह को स्मरण करने का दिन है. हिरणकश्यपु जैसे दैत्य को भी स्मरण करना चाहिए कि बड़ी से बड़ी शक्ति प्रभु के आगे छोटी है.उन्होंने कहा कि भक्त प्रहलाद का कोई दुश्मन था तो वह था उसका पिता हिरणयकश्यपु जिसके भाई हिरण्याक्ष का वध भगवान विष्णु ने किया था. प्रतिशोध में जल रहे हिरणयकश्यपु ने पता किया कि भगवान विष्णु तो दैवीय शक्ति हैं और उस मूर्ख ने प्रभु को भौतिक शक्ति से पराजित करना चाहा लेकिन असफल रहा. स्मरण रहे कि जगत में दो ही शक्तियां हैं दैवीय और भौतिक और भौतिक शक्ति हमेशा दैवीय शक्ति से पराजित होगी.
संत रितेश्वर जी ने कहा कि बड़भागी हैं वे लोग जो शिवरीनारायण की धरा पर जन्मे हैं.भारत में काशी, अयोध्या और वृन्दावन तीन ही स्थान हैं जहाँ अध्यात्म की अविरल धारा बहती है.क्योंकि काशी शब्द, अयोध्या भाव और वृन्दावन रस की भूमि हैं और शिवरीनारायण ऐसा अनूठा स्थान है जहाँ ये तीनों एक साथ मिल जाते हैं.
उन्होंने कहा कि होली उल्लास का प्रतीक है. यह त्यौहार इस बात को भी बताता है कि जीवन में हर तरह के रंग हैं. प्रेम, द्वेष, घृणा, परहित लेकिन गुरु के प्रति भक्ति इन तमाम रंगों के व्यामोह से हमें उबारती है.होली इस बात का भी संदेश लेकर आता है कि जीवन में निराशा, दुःख, नैराश्य और मलीनता का कोई रंग नहीं होना चाहिए.
संत रितेश्वर जी ने कहा कि शास्त्र मनुष्य को देवत्व तक की यात्रा करा सकते हैं लेकिन शास्त्र की पहचान तो गुरु ही करा सकते हैं. उन्होंने नालंदा का उदाहरण देते हुए कहा कि शास्त्र स्वयं अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते लेकिन जीवन में कोई ऐसा गुरु मिल जाए जो तुम्हे शास्त्र के मर्म तक ले जाए तो वह सबसे बड़ी सुरक्षा है.
उन्होंने बुरा न मानो होली है की निंदा करते हुए कहा कि होली है इसलिए हर किस्म की फुहड़ता का बुरा मानना है. होली का अर्थ शराब पीकर नशे में बदतमीजी करना नहीं है, यह हमारी कलुषता और कुंठा को दूर करने का पर्व है.उन्होंने आह्वान किया कि होली का पर्व मदिरा से मुक्त हो.
और यह गुरूजी के ही आह्वान का असर था कि नगर में इस बार अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से होली का त्योहार मनाया गया. कहीं से कोई विवाद या उपद्रव की खबर नहीं आई.
पांच दिवसीय रंगोंत्सव में शिवरीनारायण तथा आसपास के गाँवो के नागरिकों के अतिरिक्त रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, दिल्ली, कनाडा से भी लोग पहुंचे. जिनमें दिल्ली की विधायक शिखा राय, आशीष तिवारी,अरुण यादव पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल,कनाडा से सांद्रा हालेंड, मेजर अरोड़ा हरजीत सिंह दिल्ली, संघमित्रा वालिया, उषा राय मुंबई
बिलासपुर से अनिल टाह, अनिल खंडेलवाल, रायगढ़ से सुरेश अग्रवाल, पूनम अग्रवाल रायपुर से राकेश अग्रवाल, मनोज गुप्ता आदि उपस्थित थे.
No comments:
Post a Comment