सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले का चर्चित सामाजिक बहिष्कार मामला अब और अधिक गर्माता नजर आ रहा है।
ग्राम पंचायत कैथा में स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि इस गांव से सैकड़ों शिक्षित लोग—जिनमें शिक्षक एवं विभिन्न शासकीय व सामाजिक पदों पर आसीन व्यक्ति शामिल हैं—होने के बावजूद कुछ दबंग और सामाजिक पदों पर बैठे लोग खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
मामला जब थाना बिलाईगढ़ पहुंचा तो थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश चंद्रवंशी द्वारा संबंधित लोगों को समझाइश दी गई थी कि कानून किसी को भी किसी परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद सभी को चेतावनी देकर वापस भेज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद दबंगों ने पुलिस की समझाइश को नजरअंदाज कर दिया।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों की शिक्षा देने वाले कुछ शिक्षक भी शराब के नशे में पीड़ित परिवार और उनका समर्थन करने वालों को खुलेआम दौड़ा-दौड़ा कर मारने की बात करते नजर आए। इससे गांव में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है।
अब सवाल यह उठता है कि कानून को ठेंगा दिखाने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या किसी राजनीतिक दबाव के चलते कानून व्यवस्था सुस्त पड़ी हुई है?
वहीं, सामाजिक बहिष्कार का शिकार पीड़ित परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है, या फिर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा—यह देखना अब बेहद जरूरी हो गया है।







